स्थान: महाकाल वन, उज्जैन
📜 कथा: पार्वती का पुत्र, गण का श्राप और कुण्डेश्वर महिमा
👶 पार्वती का पुत्र वीरक और महाकाल वन
एक बार माता पार्वती ने शिवजी से पूछा –
“प्रभु, हमारा पुत्र वीरक कहां है?”
शिवजी ने उत्तर दिया –
“वह महाकाल वन में तपस्या कर रहा है।”
पार्वतीजी ने आग्रह किया कि –
“मैं भी पुत्र वीरक के दर्शन करना चाहती हूँ, मुझे वहां ले चलिए।”
शिवजी ने हामी भर दी और दोनों नंदी बैल पर सवार होकर महाकाल वन की ओर प्रस्थान कर गए।
🏔️ पर्वत पर विश्राम और सेवा में नियुक्त गण
रास्ते में एक स्थान पर पर्वत देख पार्वती भयभीत हो गईं।
शिवजी ने कहा –
“तुम यहीं रुक जाओ, मैं पर्वत की परीक्षा कर लौटता हूँ।
तब तक कुण्ड नामक गण तुम्हारी सेवा में रहेगा और तुम्हारी आज्ञा का पालन करेगा।”
🔟 वर्ष बीते, शिव नहीं लौटे
दस वर्ष बीत गए, लेकिन शिवजी नहीं लौटे।
पार्वती दुखी हो विलाप करने लगीं और कुण्ड से कहा –
“तुम मुझे शिवजी के दर्शन कराओ।”
जब कुण्ड गण दर्शन कराने में असमर्थ रहा, तो क्रोधित पार्वती ने उसे मनुष्य योनि में जाने का श्राप दे दिया।
🕉️ शिव का आगमन और पार्वती की कृपा
ठीक उसी समय शिवजी प्रकट हो गए।
पार्वती ने श्रापग्रस्त कुण्ड से कहा –
“तुम अब महाकाल वन जाओ और उत्तर दिशा में स्थित एक दिव्य शिवलिंग का पूजन करो।
वहाँ भैरव रूप में खड़े रहो, तुम्हारे ही नाम पर यह शिवलिंग ‘कुण्डेश्वर’ कहलाएगा।
इस लिंग की पूजा से तुम्हें अक्षय पद प्राप्त होगा।”
🙏 कुण्ड की भक्ति और सिद्धि
कुण्ड गण ने पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए महाकाल वन में शिवलिंग की पूजा की।
उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे अक्षय पद, अर्थात नाशरहित, मोक्षदायी स्थिति प्रदान की।
🌿 धार्मिक मान्यता
- कहा जाता है कि श्री कुण्डेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से तीर्थों के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।
- इस स्थान पर श्रद्धा से की गई पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है।
- शिवलिंग के उत्तर दिशा की ओर स्थित होने से इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
📜 पौराणिक श्लोक:
“कुण्डो भक्तो मम प्रीत्या, पूजितो यः शिवालये।
तस्य दर्शन मात्रेण, सर्वतीर्थ फलोदयः।।”
अर्थ:
जो भक्त कुण्डेश्वर महादेव का पूजन करता है, उसे सभी तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है।
📍 मंदिर का स्थान
श्री कुण्डेश्वर महादेव मंदिर
स्थान: महाकाल वन क्षेत्र, उज्जैन
दिशा: उत्तर दिशा में स्थित सिद्ध शिवलिंग
📅 विशेष पूजन अवसर
- श्रावण मास
- महाशिवरात्रि
- सोमवार को विशेष पूजा लाभकारी होती है।
❓FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. श्री कुण्डेश्वर महादेव की विशेषता क्या है?
A. इस लिंग के दर्शन मात्र से तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है।
Q. यह शिवलिंग किस दिशा में स्थित है?
A. उत्तर दिशा में।
Q. कुण्ड कौन था?
A. वह शिवजी का गण था, जिसे पार्वती ने श्राप दिया और बाद में भैरव रूप में पूजन का आदेश दिया।
Q. यहां कौन से पुण्य प्राप्त होते हैं?
A. अक्षय पद, मनोकामना पूर्ति, और तीर्थ दर्शन फल।

84 महादेव : श्री कुण्डेश्वर महादेव(40)
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