स्थान: महाकाल वन, उज्जैन
📜 पौराणिक कथा : पापी राजा का उद्धार
प्राचीन काल में म्लेच्छ गणों का राजा लुम्पाधिप था। उसकी रानी का नाम था विशाला। वह अत्यंत बलशाली था लेकिन धर्म से विमुख।
🐄 आश्रम पर हमला और ब्राह्मण वध
एक दिन राजा सामग नामक ब्राह्मण के आश्रम गया। वहाँ उसने कामधेनु गाय की मांग की, जिसे ब्राह्मण ने मना कर दिया। क्रोध में आकर लुम्पाधिप ने:
- कामधेनु गाय को छीन लिया
- पूरे आश्रम को नष्ट कर दिया
- और अंततः सामग मुनि की हत्या कर दी
👦 पुत्र समिधा का श्राप
कुछ समय बाद मुनि का पुत्र समिधा आश्रम लौटा। उसने अपने पिता को मृत पाया और क्रोध तथा दुःख से भर गया। उसने राजा को श्राप दिया:
“तू कुष्ठ रोग से पीड़ित होकर दीन अवस्था में मरेगा।”
🕉️ नारद मुनि का मार्गदर्शन
समय के साथ राजा लुम्पाधिप कुष्ठ रोग से पीड़ित हो गया और मृत्यु की आशा से अपनी चिता पर लेट गया।
तभी वहाँ देवर्षि नारद पहुंचे और बोले:
“हे राजन! यह सब ब्राह्मण वध और अधर्म के कारण हुआ है। यदि तुम महाकाल वन में केशवार्क महादेव के पास स्थित एक दिव्य शिवलिंग की पूजा करोगे तो तुम्हारा उद्धार संभव है।”
🚿 शिप्रा स्नान और शिव पूजन
राजा ने अपनी रानी विशाला के साथ शिप्रा स्नान किया और शिवलिंग के दर्शन और पूजन किया।
दर्शन मात्र से ही उसका कुष्ठ रोग दूर हो गया।
इसके बाद उसने वहां विहार कर रहे मुनियों और ब्राह्मणों का सम्मान किया।
🌟 लुम्पेश्वर महिमा
भगवान शिव ने राजा के पश्चाताप और भक्ति से प्रसन्न होकर उसे पापमुक्त कर दिया।
तब से यह शिवलिंग “लुम्पेश्वर महादेव” कहलाया।
📜 श्लोक:
“लुम्पाधिपेन पूजितो लिंगो देवो महाकले।
दर्शनेन तस्य रोगो नष्टो, पापं विनश्यति सप्तजन्मानि।।”
अर्थ:
राजा लुम्पाधिप द्वारा पूजित यह लिंग सभी रोगों और सात जन्मों के पापों को नष्ट करता है।
🌿 धार्मिक मान्यताएं:
- लुम्पेश्वर महादेव के दर्शन और पूजन मात्र से सात जन्मों के पापों का नाश होता है
- कुष्ठ, चर्म रोग, दंडनीय कष्ट दूर होते हैं
- अंतकाल में भक्त को परम पद (मोक्ष) की प्राप्ति होती है
- श्रावण मास में विशेष पूजा करने से अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है
📍 मंदिर स्थान:
श्री लुम्पेश्वर महादेव मंदिर
स्थान: महाकाल वन, उज्जैन
निकट: केशवार्क महादेव के पास
❓FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. लुम्पेश्वर महादेव किसने स्थापित किया था?
A. इस शिवलिंग की महिमा राजा लुम्पाधिप के पूजन से जुड़ी है।
Q. इस मंदिर का विशेष प्रभाव क्या है?
A. कुष्ठ रोग और सात जन्मों के पापों का नाश करता है।
Q. पूजा कैसे करें?
A. शिप्रा स्नान के बाद संपूर्ण श्रद्धा और पश्चाताप भाव से शिवलिंग का पूजन करें।
Q. यहां कब जाना शुभ होता है?
A. विशेषकर श्रावण मास, सोमवार, और महाशिवरात्रि के अवसर पर।

84 महादेव : श्री लुम्पेश्वर महादेव(41)
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