स्थान – महाकाल वन, उज्जैन
📜 श्लोक:
कुसुमैः पूजितो लिंगो यो दत्तो पार्वतीसुतः।
सदा पूज्यतमो देवो विख्यातः कुसुमेश्वरः।।
श्लोक का अर्थ:
जो शिवलिंग कुसुमों से पूजित होकर शिव पुत्र के रूप में पार्वती को प्राप्त हुआ, वह कुसुमेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ और वह सदा पूज्यतम देवता बन गया।
📖 कथा – पुष्पों से पूजित गणेश, पार्वती का पुत्र और कुसुमेश्वर लिंग की उत्पत्ति
एक बार भगवान शिव और माता पार्वती महाकाल वन में भ्रमण कर रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि एक गणेश बालक पुष्पों से खेल रहा है और अन्य बालक उस पर पुष्पवर्षा कर रहे हैं।
🌼 शिव का हर्ष और पार्वती को पुत्र देना
शिवजी ने उस पुष्पों से खेलते हुए बालक को अत्यंत प्रिय बताया और उसे पार्वती को उपहार स्वरूप दे दिया।
पार्वती ने अपने सखी विजया से कहा कि वह जाकर उस बालक को बुला लाए।
🕉️ बालक का श्रृंगार और शिवगणों में प्रवेश
विजया बालक को ले आई। पार्वती ने उसे:
- सुंदर आभूषणों,
- चंदन,
- और पुष्पों से सज्जित किया,
और फिर शिवगणों के बीच खेलने के लिए भेज दिया। बालक वहीं पुष्पों के साथ खेलने लगा।
🙏 पार्वती की प्रार्थना और शिव का वरदान
पार्वती ने शिव से कहा:
“यह मेरा पुत्र है। आप इसे ऐसा वरदान दीजिए कि यह सभी गणों में प्रथम पूज्य हो। और चूंकि यह पुष्पों से मंडित है, इसका नाम ‘कुसुमेश्वर’ हो।”
शिवजी ने प्रसन्न होकर वरदान दिया:
“जो मनुष्य कुसुमेश्वर महादेव का दर्शन और पुष्पों से पूजन करेगा,
उसे कभी कोई पाप नहीं लगेगा,
और वह अंतकाल में शिवलोक को प्राप्त करेगा।”
🌸 धार्मिक मान्यता
- श्री कुसुमेश्वर महादेव गणेश तत्व और शिव तत्व का अद्भुत समन्वय हैं।
- यहां पुष्पों से पूजन विशेष फलदायक माना गया है।
- श्रद्धा से दर्शन करने वाले को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
📍 मंदिर का स्थान
श्री कुसुमेश्वर महादेव मंदिर
स्थान: महाकाल वन क्षेत्र, उज्जैन
विशेष पहचान: पुष्पों से प्रिय शिव पुत्र का रूप
📅 विशेष पूजन काल
- विनायक चतुर्थी
- श्रावण मास के सोमवार
- महाशिवरात्रि
- गणेश चतुर्थी
इन अवसरों पर यहां विशेष पूजन करने से संतान सुख, गणेश कृपा और शिवलोक प्राप्ति होती है।
❓FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. श्री कुसुमेश्वर महादेव की उत्पत्ति कैसे हुई?
A. यह शिव के प्रिय बालक गणेश के रूप में पार्वती को प्रदान किया गया था, जिसे पुष्पों से मंडित होने के कारण कुसुमेश्वर नाम मिला।
Q. यहां विशेष किस वस्तु से पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है?
A. विशेषतः पुष्पों से पूजन अत्यंत शुभ और पापों से मुक्त करने वाला होता है।
Q. श्री कुसुमेश्वर महादेव के दर्शन से क्या लाभ होता है?
A. पापों से मुक्ति, शिवलोक की प्राप्ति और गणेश कृपा मिलती है।

84 महादेव : श्री कुसुमेश्वर महादेव(38)
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