स्थान: रामेश्वर गली, सती दरवाजे के पास, उज्जैन
विषय: ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति और विजय प्राप्ति प्रदान करने वाले – श्री रामेश्वर महादेव
📜 श्लोक:
“एकानेत्रिशतं विद्धि देवं रामेश्वरं प्रिये।
यस्य दर्शन मात्रेण मुच्यते ब्रह्म हत्यया॥”
— स्कन्द पुराण
अर्थ:
हे प्रिये! जानो कि यह रामेश्वर भगवान त्रिनेत्रधारी हैं। इनके केवल दर्शन मात्र से भी मनुष्य ब्रह्महत्या जैसे महापाप से मुक्त हो जाता है।
🕉️ पौराणिक कथा – परशुराम जी और श्री रामेश्वर महादेव
🧔🏻♂️ परशुराम का जन्म और पराक्रम
त्रेता युग में भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में परशुराम जी का जन्म भृगु ऋषि के शाप के प्रभाव से हुआ था। उनकी माता का नाम रेणुका था और पिता थे महातपस्वी जमदग्नि ऋषि।
परशुराम के चार भाई भी थे, लेकिन उनमें परशुराम सबसे अधिक तेजस्वी, ज्ञानी और युद्धकला में पारंगत थे।
⚔️ माता का वध और ब्रह्महत्या दोष
एक बार जमदग्नि ऋषि ने रेणुका को यज्ञ हेतु गंगा तट से जल लाने को कहा। वहां उन्होंने चित्ररथ गंधर्व को अप्सराओं के साथ विहार करते देखा और थोड़ी देर तक वहीं रुकी रहीं।
इस कारण यज्ञ विलंबित हो गया और क्रोधित होकर जमदग्नि ने माता का वध करने का आदेश अपने पुत्रों को दिया।
किसी से यह न हो सका, परंतु परशुराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए माता का शिरोच्छेद कर दिया।
इस आज्ञापालन से प्रसन्न होकर जमदग्नि ने उन्हें वरदान दिया —
“जो चाहो मांगो।”
परशुराम ने कहा —
“माता पुनः जीवित हो जाए और मेरे भाई पूर्ववत् हो जाएं।”
यह सुनकर जमदग्नि अत्यंत प्रसन्न हुए और सभी वरदान दे दिए।
लेकिन इस कृत्य के कारण परशुराम को ब्रह्महत्या दोष लग गया।
🏹 कार्तवीर्य अर्जुन का वध और क्रोधपूर्ण अभियान
कुछ समय पश्चात् हैहय वंश में सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन नामक राजा हुआ, जिसने जमदग्नि ऋषि की कामधेनु गाय छीन ली।
क्रोधित होकर परशुराम ने:
- अर्जुन की हज़ार भुजाओं को काट डाला,
- उसकी पूरी सेना का संहार कर दिया,
- और फिर क्षत्रियों का 21 बार संहार किया।
यह भी एक अत्यंत भयंकर ब्रह्महत्या पाप बन गया।
🧘♂️ तीर्थ, तप, दान – फिर भी दोष दूर नहीं
ब्रह्महत्या के निवारण हेतु परशुराम ने:
- अश्वमेध यज्ञ किया,
- कश्यप मुनि को संपूर्ण पृथ्वी दान की,
- हिमालय, रैवत पर्वत, बद्रिकाश्रम पर तपस्या की,
- गया, प्रयाग, पुष्कर, केदारनाथ, नर्मदा, कुरुक्षेत्र आदि तीर्थों में स्नान किया।
फिर भी ब्रह्महत्या दोष दूर नहीं हुआ।
😔 परशुराम का संशय और नारद मुनि का समाधान
जब इतने पुण्यकर्म और तपस्या के बाद भी दोष दूर नहीं हुआ, तो परशुराम ने सोचना शुरू किया:
“क्या ये सब झूठ हैं? क्या तीर्थ, यज्ञ, दान और तप की कोई शक्ति नहीं?”
तभी वहाँ देवर्षि नारद आए।
परशुराम ने उन्हें संपूर्ण वृतांत सुनाया।
नारद मुनि बोले:
“हे राम! आप महाकाल वन जाइए। वहाँ जटेश्वर महादेव के समीप एक दिव्य लिंग स्थित है।
उसका श्रद्धापूर्वक पूजन करें, वहीं आपके दोषों का निवारण संभव है।”
🛕 रामेश्वर महादेव का पूजन और पाप से मुक्ति
नारद मुनि के निर्देश पर परशुराम महाकाल वन आए और श्री रामेश्वर महादेव का पूजन किया।
उनके भक्ति-भाव, तप और पश्चाताप से भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें ब्रह्महत्या दोष से मुक्त कर दिया।
तभी से उस लिंग का नाम पड़ा — श्री रामेश्वर महादेव।
🌼 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)
- ब्रह्महत्या जैसे महापाप से मुक्ति
- शत्रुनाश और विजय की प्राप्ति
- कर्तव्यपालन करने वालों को दिव्य फल
- पितृदोष, मानसिक बोझ और तपफल का सिद्ध होना
📅 विशेष पूजन तिथि:
चतुर्दशी, त्रयोदशी, पितृ पक्ष, अक्षय तृतीया
📍 मंदिर की स्थिति
श्री रामेश्वर महादेव मंदिर,
रामेश्वर गली, सती दरवाजे के पास, उज्जैन (मध्य प्रदेश)

84 महादेव : श्री रामेश्वर महादेव (29)
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