स्थान: गया कोठा, उज्जैन
विषय: ब्रह्महत्या और गौहत्या जैसे महापापों से मुक्ति दिलाने वाले शिव – श्री जटेश्वर महादेव
📜 श्लोक:
“एष ते कथितो देवि प्रभावः पापनाशनः।
जटेश्वरस्य देवस्य श्रृणु रामेश्वरं शिवम्॥”
— स्कंद पुराण
🕉️ पौराणिक कथा – राजा वीरधन्वा और ब्रह्महत्या से मुक्ति की कहानी
प्राचीन काल में राजा वीरधन्वा नामक एक धर्मपरायण, यशस्वी और बलवान राजा हुआ करते थे। एक बार वे शिकार की भावना से वन में गए और वहां मृग रूपी पाँच ब्राह्मण पुत्रों पर अनजाने में बाण चला दिया।
उन ब्राह्मण पुत्रों को पहले एक श्राप मिला था कि वे कुछ समय के लिए मृग चर्म ओढ़े वन में रहें, क्योंकि उन्होंने पूर्व में हिरणों के बच्चों का वध कर दिया था। राजा से अनजाने में हुए इस ब्राह्मण वध ने पाप की श्रंखला को जन्म दिया।
राजा जब इस अपराध को समझे तो अत्यंत व्याकुल और भयभीत होकर देवरात मुनि के पास पहुंचे, लेकिन मुनि की शांत प्रतिक्रिया ने उनके क्रोध को भड़का दिया और उन्होंने मुनि की हत्या कर दी।
इस घटना के बाद वे और अधिक अराजक हो गए। मानसिक संतुलन खो बैठे, और गालव ऋषि की कपिला गाय का भी वध कर बैठे।
🧘♂️ पथ प्रदर्शक बने मुनि वामदेव
वन में भटकते हुए उनकी भेंट मुनि वामदेव से हुई। उन्होंने राजा का अतीत जानकर कहा —
“हे राजन! तुम्हारी बुद्धि पूर्वजन्म के कर्मों से जड़ी हुई है। इससे तुम पापों की ओर आकर्षित हुए हो। अब महाकाल वन में जाओ। वहाँ अनरकेश्वर के उत्तर में एक दिव्य शिवलिंग है, उसका दर्शन ही तुम्हारा उद्धार करेगा।”
राजा ने वामदेव मुनि की बात मानी और महाकाल वन पहुँचकर पूजन-अर्चन किया। श्रद्धा और प्रायश्चित के साथ की गई पूजा से उस लिंग से जटाजूटधारी शिव प्रकट हुए। उन्होंने राजा को ब्रह्महत्या और गौहत्या जैसे महापापों से मुक्त कर दिया और उसकी जड़ीभूत बुद्धि को निर्मल कर दिया।
इस चमत्कारिक प्रसंग के बाद वह लिंग “जटेश्वर महादेव” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
🔔 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)
- ब्रह्महत्या, गौहत्या जैसे महापापों से मुक्ति
- भ्रष्ट बुद्धि का शुद्धिकरण
- श्राद्ध कर्म के दोषों का निवारण
- विपरीत मानसिक स्थिति से शांति की प्राप्ति
📅 विशेष अवसर:
- श्राद्ध पक्ष में इस कथा का स्मरण और पाठ करने से पितृगण प्रसन्न होते हैं।
📍 मंदिर की स्थिति
श्री जटेश्वर महादेव मंदिर,
गया कोठा, उज्जैन (रावण दहन स्थान के समीप)

84 महादेव : श्री जटेश्वर महादेव(28)
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