स्थान: ईदगाह के पास, इंदिरा नगर मार्ग, उज्जैन
विषय: तप, क्षमा, सेवा और युवावस्था प्राप्ति से जुड़ी महर्षि च्यवन की अद्भुत कथा
📜 श्लोक:
“त्रिशत्तमं विजानीही तवं देवि च्यवनेश्वरम्।
यस्य दर्शन मात्रेण स्वर्गभ्रंशो न जायते॥”
— स्कन्द पुराण
अर्थ:
हे देवी! जानो कि यह त्रिशत (84) शिवलिंगों में 30वां च्यवनेश्वर महादेव हैं, जिनके दर्शन मात्र से स्वर्ग से पतन नहीं होता। यह देवता स्वर्गगामी को थाम लेते हैं और शिवलोक की ओर मोड़ देते हैं।
🕉️ पौराणिक कथा – महर्षि च्यवन और श्री च्यवनेश्वर महादेव
🧘🏻♂️ च्यवन ऋषि की कठोर तपस्या
महर्षि भृगु के पुत्र च्यवन ऋषि अत्यंत तेजस्वी और जितेन्द्रिय थे। वे वितस्ता नदी के तट पर तपस्या में लीन हो गए।
वर्षों की कठोर साधना से उनका शरीर धूल, मिट्टी और बेलों से ढक गया। वे पूर्णतः स्थिर योगमुद्रा में तप कर रहे थे।
👸🏼 सुकन्या की भूल और राजकीय संकट
एक बार राजा शर्याति वन विहार करते हुए अपनी पुत्री सुकन्या और रानियों के साथ वहां पहुंचे।
सुकन्या को मिट्टी की उस बांबी में दो चमकती आंखें दिखीं। कौतूहलवश उसने उसमें कांटे चुभा दिए।
इससे च्यवन ऋषि की आंखों से रक्त बहने लगा और वे पीड़ा में आ गए।
ऋषि के क्रोध से राजा की सेना में रोग फैलने लगे। राजा को जब सारा सत्य ज्ञात हुआ तो उन्होंने क्षमा मांगी और सुकन्या का विवाह च्यवन ऋषि से कर दिया।
🧪 अश्विनीकुमारों का आगमन और यौवन प्राप्ति
कुछ समय बाद देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमार आश्रम में आए।
उन्होंने सुकन्या से कहा:
“तुम इस वृद्ध से विवाह कर व्यर्थ जीवन क्यों बिता रही हो? हम दोनों में से किसी एक को वर लो।”
सुकन्या ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
फिर अश्विनीकुमारों ने कहा:
“यदि तुम च्यवन ऋषि को जलाशय में लाकर स्नान कराओ, तो हम उन्हें यौवन प्रदान कर सकते हैं।”
सुकन्या ने ऋषि को बताया। ऋषि ने हामी भरी।
तीनों जल में उतरे, और जब बाहर आए तो तीनों समान, युवा, सुंदर और तेजस्वी थे।
अब सुकन्या पहचान नहीं पा रही थी, पर उसने ध्यान से पहचाना और अपने वास्तविक पति को चुना।
🧉 अमृत-पान का संकल्प और इंद्र का क्रोध
ऋषि च्यवन ने अश्विनीकुमारों से वादा किया कि वे उन्हें देवों के समक्ष अमृत पान कराएंगे।
इसके लिए उन्होंने यज्ञ आरंभ किया।
इंद्रदेव को यह निंदनीय लगा। उन्होंने यज्ञ को रोकने और च्यवन ऋषि को वज्र से नष्ट करने की चेतावनी दी।
च्यवन ऋषि भयभीत नहीं हुए, वे महाकाल वन गए और एक दिव्य शिवलिंग का पूजन-अर्चन आरंभ किया।
🛕 च्यवनेश्वर महादेव की कृपा
ऋषि की भक्ति और तप से भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया:
“हे ऋषिवर! इंद्र के वज्र से तुम्हें कोई क्षति नहीं होगी।
तुम निश्चिन्त हो जाओ।”
तभी से उस शिवलिंग का नाम च्यवनेश्वर महादेव हुआ।
🌼 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)
- पापों से मुक्ति
- भय, रोग और संकट का निवारण
- तप, संयम और सेवा भाव की सिद्धि
- स्वर्ग एवं शिवलोक की प्राप्ति
- युवावस्था एवं बल की प्राप्ति (प्रतीकात्मक या आध्यात्मिक)
📅 विशेष पूजन तिथि:
शिवरात्रि, गुरुपूर्णिमा, पौष अमावस्या, श्रावण मास के सोमवार
📍 मंदिर की स्थिति
श्री च्यवनेश्वर महादेव मंदिर,
ईदगाह के पास, इंदिरा नगर मार्ग, उज्जैन, मध्य प्रदेश

84 महादेव : श्री च्यवनेश्वर महादेव(30)
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