स्थान: महाकाल वन, उज्जैन
विषय: नरक मुक्ति के दाता शिव – अनरकेश्वर की दिव्य महिमा

📜 श्लोक:
“अनरकेश्वर दर्शनं, पापसंघात नाशनं।
चतुर्दश्यां पूजनं, शतजन्म पातकं क्षयम्॥”


🕉️ पौराणिक कथा – राजा निमि और अनरकेश्वर महादेव की महिमा

प्राचीन काल में राजा निमि नामक एक पुण्यात्मा राजा थे।
अपने धर्मपूर्ण जीवन और श्रद्धा से उन्होंने अनेकों पुण्य अर्जित किए। जब उनका शरीर छूटा, तब यमराज के दूत उन्हें विमान में बैठाकर स्वर्ग ले जा रहे थे।

लेकिन उन्होंने देखा कि दूत उन्हें दक्षिण मार्ग से ले जा रहे हैं, जहाँ नरक के द्वार पड़ते हैं।
जैसे ही वे नरक के समीप पहुँचे, राजा ने वहां असंख्य पापियों को कठोर यातनाएं भोगते हुए देखा। इस द्रश्य से उनका मन द्रवित हो उठा

उन्होंने यमदूत से पूछा –

“मैं तो पुण्यात्मा हूँ, फिर मुझे नरक के मार्ग से क्यों ले जाया जा रहा है?”

यमदूत ने उत्तर दिया:

“हे राजन, आपने एक बार श्राद्ध के दिन दक्षिणा नहीं दी थी, उसी अपराध के कारण आपको यह मार्ग देखना पड़ रहा है।”

राजा ने फिर पूछा –

“तो मुझे स्वर्ग किस कर्म से मिल रहा है?”

उत्तर मिला:

“आपने महाकाल वन में, अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को श्री अनरकेश्वर महादेव के दर्शन व पूजन किए थे। उसी पुण्य से आपको स्वर्ग की प्राप्ति हो रही है।”


💨 राजा का त्याग और करुणा

जब राजा आगे बढ़ने लगे, तब नरक के यातनाओं को भोग रहे पापियों ने कहा –

“हे राजन! आपकी देह से निकलने वाली वायु भी हमें शांति दे रही है। कृपा करके कुछ समय ठहर जाइए।”

राजा ने उस करूण दृश्य को देखकर निर्णय लिया कि वे स्वर्ग नहीं जाएंगे, बल्कि वहीं रुककर पापियों को अपनी उपस्थिति से सुख देंगे।

तभी इंद्रदेव वहाँ प्रकट हुए और राजा से स्वर्ग चलने की विनती की।
राजा ने मना कर दिया और पूछा –

“इन पापियों को उनके कर्मों से मुक्ति कैसे मिलेगी?”

इंद्रदेव ने उत्तर दिया:

“यदि आप अपने अनरकेश्वर दर्शन-पुण्य का फल इन पापियों को दान कर दें, तो ये सभी पापों से मुक्त हो सकते हैं।”

राजा निमि ने निःस्वार्थ भाव से अपना पुण्य फल दान कर दिया। फलस्वरूप, सभी पापी नरक से मुक्त होकर दिव्य रूप में स्वर्ग को प्राप्त हुए।


🔔 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)

  • नरक भय से मुक्ति
  • सौ जन्मों तक के पापों का विनाश
  • स्वर्ग लोक की प्राप्ति
  • श्राद्ध दोष, तर्पण दोष से मुक्ति
  • आत्मा को शांति एवं मुक्त गति मिलती है

📅 विशेष तिथि:

  • अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी
  • श्राद्ध पक्ष के दौरान पूजन विशेष फलदायक

📍 मंदिर की स्थिति

श्री अनरकेश्वर महादेव मंदिर,
महाकाल वन क्षेत्र, उज्जैन (स्थान निर्देश पर आधारित, पुष्टि आवश्यक)

84 महादेव : श्री अनरकेश्वर महादेव (27)
84 महादेव : श्री अनरकेश्वर महादेव (27)

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