स्थान: महाकाल वन क्षेत्र, उज्जैन
विषय: चंद्रमा की मुक्ति और शिव कृपा
📜 श्लोक (प्राचीन संदर्भ अनुसार):
“सोमस्य पूजनादेव लिङ्गं सिद्धिप्रदं भवेत्।
यः पश्यति तु सोमेशं स सर्वपापविनिर्मुक्तः स्यात्॥”
🌕 पौराणिक कथा: श्रापित चंद्रमा और शिव से मुक्ति
प्राचीन काल में दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को अपनी कन्याओं से भेदभावपूर्ण व्यवहार करने पर श्राप दे दिया, जिससे चंद्रमा विलुप्त हो गया।
चंद्रमा के विलुप्त होते ही धरती पर औषधियां सूखने लगीं, वनस्पति नष्ट होने लगी और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में आ गया।
इस संकट को देखकर देवताओं ने ब्रह्माजी से प्रार्थना की।
ब्रह्मा ने समुद्र मंथन का आदेश दिया। मंथन से पुनः एक चंद्रमा प्रकट हुआ।
🙏 महाकाल वन में चंद्रमा का तप
नए रूप में प्रकट चंद्रमा, अभी भी श्राप से ग्रस्त था।
तब भगवान विष्णु की आज्ञा से वह महाकाल वन पहुंचा और वहां एक दिव्य शिवलिंग की तपस्या करने लगा।
चंद्रमा ने श्रद्धा से शिव पूजन कर भगवान शिव को प्रसन्न किया।
भगवान शिव ने प्रसन्न होकर चंद्रमा को वरदान दिया:
“तुम्हारा शरीर पुनः तेजस्वी होगा और तुम देवों के राजा समान पूजित रहोगे।”
चंद्रमा के पूजन से प्रसन्न होकर शिव ने कहा,
“अब से यह लिंग ‘सोमेश्वर महादेव’ के नाम से प्रसिद्ध होगा।”
🌿 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)
- सभी प्रकार के पापों और कलंकों से मुक्ति
- रोगों, विशेष रूप से मानसिक रोग और मानसिक चिंता से राहत
- तेज, कीर्ति, और सौंदर्य की प्राप्ति
- अंत समय में मोक्ष की प्राप्ति
📅 विशेष दर्शन तिथि:
- सोमवार विशेष फलदायक
- श्रावण मास के सभी दिन
- पूर्णिमा एवं चंद्रग्रहण पर पूजन अत्यंत शुभ
📍 मंदिर की स्थिति
श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर,
महाकाल वन क्षेत्र, उज्जैन

84 महादेव : श्री सोमेश्वर महादेव (26)
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