स्थान: पटनी बाजार, उज्जैन
अप्सराओं की शिव भक्ति का साक्षात प्रतीक।

📜 श्लोक (स्कन्द पुराण – महाकाल संहिता):
“देवं सप्तदशं विद्धि विख्यातं अप्सरेश्वरं।
यस्य दर्शन मात्रेण लोकोऽभीष्टानवाप्नुयात्।।”

📖 श्लोक का अर्थ:
हे देवी! सप्तदशवाँ (17वां) शिवलिंग अप्सरेश्वर कहलाता है।
इसके दर्शन मात्र से मनुष्य अपने अभिलषित फल को प्राप्त करता है।


📚 पौराणिक कथा: अप्सराओं की आराधना और रंभा का शापमोचन

प्राचीन काल में स्वर्गलोक के नंदन वन में, इंद्र देव अप्सराओं का नृत्य देख रहे थे। उसी समय:

  • प्रसिद्ध अप्सरा रंभा से नृत्य में चूक हो गई
  • इंद्र ने क्रोधित होकर उसे कांतिहीन होने का शाप दिया
  • शाप के कारण रंभा पृथ्वी लोक पर आ गिरी और विलाप करने लगी

उसका दुःख देखकर अन्य अप्सराएं भी स्वर्ग से उतरकर उसके पास आ गईं।


🧘 नारद मुनि का मार्गदर्शन और महाकाल वन की यात्रा

उसी समय देवर्षि नारद वहाँ पहुँचे और दुख का कारण पूछा।
अप्सराओं ने रंभा के शाप की विस्तृत कथा सुनाई।
नारदजी ने ध्यान कर कहा:

“आप सभी महाकाल वन जाएं।
वहां हरसिद्धि पीठ के सामने स्थित एक दिव्य लिंग की आराधना करें।
उसी लिंग की कृपा से पूर्व में ऊर्वशी को भी अपने पति की पुनः प्राप्ति हुई थी।”


🙏 अप्सराओं द्वारा पूजन और वरदान

  • अप्सराएं महाकाल वन पहुँचीं
  • हरसिद्धि मंदिर के सामने स्थित दिव्य लिंग की श्रद्धापूर्वक आराधना की
  • भगवान शिव प्रसन्न हुए और वरदान दिया:

“तुम सभी पुनः स्वर्ग की शोभा बनोगी। तुम्हारा स्थान और यश फिर से प्राप्त होगा।”

तभी से यह लिंग “अप्सरेश्वर महादेव” कहलाया।


🌟 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)

  • खोया हुआ पद, सम्मान और प्रतिष्ठा पुनः प्राप्त होता है
  • स्थानभ्रष्ट व्यक्ति को फिर से यथोचित स्थान प्राप्त होता है
  • दूसरों को यहां दर्शन के लिए भेजने मात्र से भी फल प्राप्त होता है
  • विशेष तिथियाँ:
    • अष्टमी
    • पूर्णिमा
    • सोमवार
    • श्रावण मास

🛕 मंदिर की स्थिति (Location)

📍 श्री अप्सरेश्वर महादेव मंदिर
📍 पटनी बाजार, उज्जैन, मध्य प्रदेश
हरसिद्धि मंदिर के सामने स्थित है।

84 महादेव : श्री अप्सरेश्वर महादेव(17)
84 महादेव : श्री अप्सरेश्वर महादेव(17)

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