स्थान: मोदी की गली, गोपाल मंदिर के पास, उज्जैन
गृह कलह से मुक्ति और पारिवारिक शांति का साक्षात स्थल।
📜 श्लोक (स्कंदपुराण अष्टादशोअध्यायः, प्रथम श्लोक):
“देवमष्टादशं विद्धि ख्यातं कलकलेश्वरम्।
यस्य दर्शन मात्रेण कल्हौनैव जायते।।”
📖 श्लोक का अर्थ:
हे देवी! अष्टादशवाँ (18वां) शिवलिंग कलकलेश्वर के नाम से विख्यात है।
जिसके केवल दर्शन मात्र से ही कलह और विवाद समाप्त हो जाते हैं।
📚 पौराणिक कथा: जब शिव-पार्वती के बीच हुआ कलह
एक बार देवी पार्वती, मातृकाओं के संग मंडप में विराजमान थीं।
उन्हें काली देख भगवान शिव ने हास्य में कह दिया:
“हे महाकाली! तुम मेरे गौर वर्ण के समीप बैठो,
तुम्हारा कृष्ण वर्ण मेरी सफेद वेशभूषा के साथ
बिजली की तरह दमक उठेगा।”
माता पार्वती इस हास्य से रुष्ट हो गईं। उन्होंने कहा:
“जब आपने नारद को मेरे पिता के पास
विवाह प्रस्ताव के लिए भेजा था,
तब मेरा रंग नहीं देखा था?”
यह सामान्य मजाक एक भीषण कलह में बदल गया।
तीनों लोकों में प्राकृतिक असंतुलन फैल गया –
पंचतत्व, अग्नि, वायु, पृथ्वी सभी प्रभावित हुए।
🔥 जब कलह से उत्पन्न हुआ दिव्य लिंग
सभी देवता भयभीत हो गए। तभी पृथ्वी को चीरकर एक दिव्य लिंग प्रकट हुआ,
जिससे वाणी प्रस्फुटित हुई:
“इस लिंग का पूजन करो, इससे कलेश व कलह समाप्त होगा।”
तब सभी देवताओं ने उस लिंग की पूजा-अर्चना की।
माँ पार्वती का क्रोध शांत हुआ और लोकों में पुनः शांति लौटी।
तभी से यह लिंग कलह को हरने वाला – “कलकलेश्वर महादेव” कहलाया।
🌟 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)
- पति-पत्नी में चल रहे मनमुटाव, कलह का नाश होता है
- गृह शांति, पारिवारिक सुख और समरसता मिलती है
- सर्प भय, अग्नि भय, रोग भय आदि का नाश होता है
- विशेष तिथियाँ:
- चतुर्दशी,
- श्रावण मास,
- सोमवार
🛕 मंदिर की स्थिति (Location)
📍 श्री कलकलेश्वर महादेव मंदिर
📍 मोदी की गली, गोपाल मंदिर के पास
📍 अग्रवाल धर्मशाला के सामने, उज्जैन

84 महादेव : श्री कलकलेश्वर महादेव(18)
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