स्थान: भैरवगढ़, उज्जैन (सिद्धनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर)
सिद्धि के दाता और अहंकार विनाशक शिवलिंग

📜 श्लोक (स्कन्द पुराण – महाकाल संहिता):
“लिङ्गं एकादशं विद्धि देवि सिद्धेश्वरम् शुभम्।
वीरभद्र समीपे तु सर्व सिद्धि प्रदायकम्।।”

📖 श्लोक अर्थ:
हे देवी! जानो कि महाकाल वन में स्थित यह ग्यारहवां शिवलिंगसिद्धेश्वर’ है, जो वीरभद्र के समीप स्थित है और सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाला है।


📚 पौराणिक कथा: जब ब्राह्मण तप में असफल हुए

देवदारु वन में सैकड़ों ब्राह्मणों ने अलग-अलग विधियों से कठोर तपस्या आरंभ की। कोई शाकाहारी बना, कोई निराहारी, कोई पत्ते खाने लगा, कोई वीरासन में बैठा, लेकिन सैकड़ों वर्षों की तपस्या के बाद भी किसी को सिद्धि नहीं मिली

इसके कारण:

  • ब्राह्मणों में स्पर्धा, अहंकार और स्वार्थ उत्पन्न हो गया।
  • उनका ग्रंथों, तप और वेदों से विश्वास उठने लगा।
  • वे धीरे-धीरे नास्तिकता की ओर अग्रसर हो गए।

तभी आकाशवाणी हुई:

“तुम सभी ने स्वार्थ और अहंकार से तप किया है, इसलिए सिद्धि नहीं मिली।
काम, क्रोध, लोभ, मोह से मुक्त होकर जो सच्चे भाव से शिव की आराधना करता है, वही सिद्धि प्राप्त करता है।”


🌿 सिद्धि का सच्चा स्रोत: महाकाल वन

देववाणी ने मार्ग दिखाया:

“महाकाल वन में वीरभद्र के समीप स्थित लिंग की पूजा करो, वही सिद्धियों के मूल स्रोत शिव हैं।
इसी लिंग से:

  • सनकादिक को ब्रह्मज्ञान,
  • राजा वामुमन को खंड सिद्धि,
  • राजा हाय को आकाशगमन सिद्धि,
  • कृतवीर्य को हजार घोड़ों की शक्ति,
  • अरुण को अदृश्य होने की शक्ति मिली थी।”

यह सुनकर सभी ब्राह्मण महाकाल वन पहुंचे और उस लिंग की निस्वार्थ पूजा की।
महादेव प्रसन्न हुए और उन्हें वांछित सिद्धि प्रदान की।
तभी से यह लिंग “सिद्धेश्वर महादेव” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।


🙏 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)

  • जो श्रद्धालु छह माह तक नियमपूर्वक दर्शन करता है, उसे चमत्कारी सिद्धि प्राप्त होती है।
  • अष्टमी और चतुर्दशी को दर्शन करने से शिवलोक की प्राप्ति होती है।
  • जो भी निस्वार्थ भाव से आराधना करता है, उसे भौतिक और आध्यात्मिक दोनों सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।

🛕 मंदिर की स्थिति (Location)

📍 श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर,
📍 सिद्धनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर,
📍 भैरवगढ़ क्षेत्र, उज्जैन, मध्य प्रदेश

84 महादेव : श्री सिद्धेश्वर महादेव (11)
84 महादेव : श्री सिद्धेश्वर महादेव (11)

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