🔱 श्री स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव – जहां शिव के तेज से उत्पन्न हुआ अग्निपुत्र सुवर्ण
स्थान: राम सीढ़ी, ढुंढेश्वर महादेव के पास, उज्जैन
84 महादेवों में स्थान: 6
“स्वर्ण ज्वालेश्वरं षष्ठं विद्धि चात्र यशस्विनी।
यस्य दर्शन मात्रेण धवानिह जायते।।”
जो पुण्य सहस्त्र यज्ञों से, अतुल्य स्वर्णदान से, और तीर्थयात्राओं से प्राप्त होता है, वह केवल श्री स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव के दर्शन से ही मिल सकता है। यह मंदिर भगवान शिव के अग्नि से उत्पन्न तेजस्वी पुत्र की कथा से जुड़ा हुआ है।
🔥 अग्निपुत्र “सुवर्ण” की दिव्य उत्पत्ति और सृष्टि में कोलाहल
सदियों पहले भगवान शिव और माता पार्वती, सौ वर्षों से गृहस्थ धर्म में लीन थे। परंतु तारकासुर वध हेतु कोई संतान उत्पन्न नहीं हुई।
इस पर देवताओं ने अग्निदेव को शिवजी के पास भेजा।
शिवजी ने त्रैलोक्य कल्याण हेतु अपना तेजस्वी अंश अग्नि देव के मुख में स्थानांतरित कर दिया।
किन्तु यह शिव-अंश इतना दाहक था कि
- अग्निदेव उसे सहन नहीं कर सके,
- और उसे गंगा में प्रवाहित कर दिया।
परंतु उस अंश से उत्पन्न हुआ एक कांचनकाय, ज्वलंत, दिव्य पुत्र – सुवर्ण।
उसकी तेजस्विता और सौंदर्य देखकर
- देवता,
- दैत्य,
- यक्ष और गन्धर्व
उस पर अधिकार हेतु युद्ध करने लगे।
⚔️ असुर-सुर युद्ध और शिव की चेतना
अग्निपुत्र सुवर्ण को लेकर हुआ भीषण युद्ध इतना भयावह था कि संपूर्ण लोकों में कोलाहल मच गया।
बालखिल्य ऋषियों, इंद्र, और बृहस्पति ने यह समाचार ब्रह्मा को सुनाया। ब्रह्मा सभी को लेकर शिवजी के पास पहुँचे।
शिवजी को ज्ञात हुआ कि यह सारा संहार अग्निपुत्र सुवर्ण के कारण हुआ है।
वे क्रोधित हुए और बोले –
“तुम ब्रह्महत्या के दोषी हो, तुम्हें छेदन, दहन और पीड़ा सहनी होगी!”
यह सुनकर अग्निदेव और सुवर्ण भयभीत हुए और शिवजी की स्तुति करने लगे।
🙏 शिव का करुणा भाव और सुवर्ण का दिव्य स्थान
अग्निदेव ने शिवजी से प्रार्थना की –
“हे महादेव, यह पुत्र आपके अंश से मुझे प्राप्त हुआ है, कृपया इसे अपने भंडार में रखें।”
शिवजी ने उस दिव्य पुत्र को गोद में उठाकर दुलारा और कहा –
“तुम अब महाकाल वन में कर्कोटक नाग के दक्षिण दिशा में प्रतिष्ठित रहोगे।”
चूँकि वह शिवलिंग ज्वाला की तरह तेजस्वी था,
इसलिए उसका नाम पड़ा –
✨ स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव
(जिसे स्थानीय रूप में स्वर्णजालेश्वर भी कहा जाता है)
🌟 स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव की महिमा
- दर्शन मात्र से सभी शुभ कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
- जो भक्त सुवर्ण (सोना) का दान करते हैं, उन्हें वैभव, संतान और यश की प्राप्ति होती है।
- श्रावण मास, चतुर्थी, और सोमवार को यहां पूजन का विशेष फल प्राप्त होता है।
📍 मंदिर का स्थान:
श्री स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव मंदिर,
राम सीढ़ी, ढुंढेश्वर महादेव के पास,
उज्जैन, मध्य प्रदेश
यह स्थान न केवल 84 महादेवों में महत्वपूर्ण है, बल्कि उन भक्तों के लिए विशेष है जो संतान सुख, धन-वैभव और संकट मुक्ति की कामना करते हैं।

84 महादेव : श्री स्वर्णज्वालेश्वर महादेव(6)
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