🔱 श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव – जहां से प्रारंभ हुआ सृष्टि का हर अस्तित्व

स्थान: महाकाल मंदिर परिसर, उज्जैन
84 महादेवों में स्थान: 5

“अनादिकल्पेश्वरं देवं पंचमं विद्धि पार्वती।
सर्व पाप हरं नित्यं अनादिर्गीयते सदा।।”

जब कुछ भी नहीं था – न आकाश, न धरती, न देव, न असुर, तब भी जो शिवलिंग था, वही है अनादिकल्पेश्वर महादेव
यह वही पवित्र स्थान है, जिसे स्वयं भगवान शंकर ने माता पार्वती को “सभी लिंगों का मूल” बताया।


🌌 जब कुछ नहीं था, तब भी शिव थे

पुराणों के अनुसार, अनादिकल्पेश्वर लिंग उस समय प्रकट हुआ था

  • जब अग्नि, सूर्य, वायु, दिशा, जल, चंद्र, देवता और पिशाच तक नहीं थे।
  • जब ब्रह्मा और विष्णु की भी उत्पत्ति नहीं हुई थी।

इसी लिंग से आगे चलकर

  • देवता, पितृ, ऋषि,
  • और समस्त चर-अचर सृष्टि उत्पन्न हुई।
    और अंत में, यह सम्पूर्ण सृष्टि इसी में विलीन हो जाती है।

🕉️ ब्रह्मा और विष्णु का अहंकार – और शिव का दिव्य स्वरूप

एक बार ब्रह्मा और विष्णु में यह विवाद हुआ कि “उनमें बड़ा कौन है?”
तभी आकाशवाणी हुई:

“महाकाल वन में स्थित कल्पेश्वर लिंग का आदि और अंत जो जान पाएगा, वही सबसे बड़ा होगा।”

  • ब्रह्मा ऊपर की दिशा में गए,
  • विष्णु पाताल की ओर गए।
    लेकिन दोनों आदि और अंत नहीं खोज पाए।

इस प्रकार यह लिंग “अनादिकल्पेश्वर” कहलाया —
जिसका न आदि है, न अंत।

84 महादेव : श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव(5)
84 महादेव : श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव(5)

🌟 अनादिकल्पेश्वर महादेव की महिमा

  • ऐसा माना जाता है कि सभी तीर्थों में स्नान और पूजन से भी अधिक पुण्य केवल इस लिंग के दर्शन मात्र से प्राप्त होता है।
  • पापी, दुष्ट और भ्रमित मन वाला व्यक्ति भी यहां दर्शन करके पवित्र और शांतचित्त हो जाता है।
  • यह लिंग हर जीव के अस्तित्व और मोक्ष का मूल माना गया है।

📍 मंदिर का स्थान:

श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर
महाकाल मंदिर परिसर, उज्जैन, मध्य प्रदेश

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को अनादिकल्पेश्वर महादेव के दर्शन का भी सौभाग्य मिलता है। यह स्थान 84 महादेव यात्रा में एक अनिवार्य तीर्थ माना गया है।

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