🔱 श्री डमरुकेश्वर महादेव – जहां डमरू की ध्वनि से असुरों का नाश हुआ
स्थान: हरसिद्धि मार्ग, राम सीढ़ी के ऊपर, उज्जैन
84 महादेवों में विशिष्ट स्थान
“अश्वमेघसहस्त्रं तु वाजपेयशतं भवेत्।
गो सहस्त्रफलं चात्र द्रष्ट्वा प्राप्स्यन्ति मानवाः।।”“जो पुण्य हजार अश्वमेध यज्ञ, सौ वाजपेय यज्ञ और हजार गौदान से प्राप्त होता है, वह केवल श्री डमरुकेश्वर महादेव के दर्शन से ही मिल जाता है।”
👿 महाअसुर वज्रासुर की उत्पत्ति और अत्याचार
प्राचीन काल में रुद्र नामक एक महाअसुर था, जिसके पुत्र वज्रासुर की शक्ति और क्रूरता अपार थी।
वज्रासुर ने अपनी तप और बल से शक्तियाँ अर्जित कीं और देवताओं को स्वर्ग से निष्कासित कर दिया।
उसके कारण पृथ्वी पर
- वेदपाठ,
- यज्ञ,
- और धर्मकर्म सब बंद हो गए।
संसार में हाहाकार मच गया।
🧘♀️ मंत्र शक्ति से उत्पन्न कन्याएँ और देवियों का युद्ध
इस संकट से निपटने के लिए देवताओं और ऋषियों ने मिलकर एक विशेष मंत्र साधना की, जिससे तेजस्वी कन्या उत्पन्न हुई।
वज्रासुर का उद्देश्य जानकर उसने अट्टहास किया, जिससे अनेक कन्याएँ उत्पन्न हुईं — वे सभी दैत्य दल से युद्ध करने लगीं।
युद्ध में जब असुर कमजोर पड़ने लगे, तो वज्रासुर ने तामसी माया का प्रयोग किया। भयभीत होकर कन्याएँ महाकाल वन की ओर चली गईं। वज्रासुर भी अपनी सेना लेकर वहीं पहुँच गया।
🙏 शिव का भैरव रूप और डमरू की दिव्य शक्ति
नारद मुनि ने यह सारी बात भगवान शिव को बताई। शिवजी ने तुरंत भैरव रूप धारण किया और महाकाल वन की ओर प्रस्थान किया।
वहाँ पहुँचकर उन्होंने
- अपना भयंकर डमरू बजाया,
- जिससे एक प्रचंड शिवलिंग उत्पन्न हुआ।
- उस लिंग से निकली अग्नि-ज्वाला ने वज्रासुर को भस्म कर दिया।
- असुरों की पूरी सेना का नाश हो गया।
चूँकि यह लिंग डमरू की ध्वनि से उत्पन्न हुआ था, इसलिए इसे “डमरुकेश्वर महादेव” नाम मिला।
🌟 डमरुकेश्वर महादेव की महिमा
- इस लिंग के दर्शन मात्र से पाप नष्ट होते हैं।
- यह मंदिर विजय, बल और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- जो भी श्रद्धा से पूजा करता है, उसे सभी संकटों से मुक्ति और युद्ध व जीवन संघर्षों में विजय प्राप्त होती है।
📍 मंदिर का स्थान:
श्री डमरुकेश्वर महादेव मंदिर,
हरसिद्धि मार्ग, राम सीढ़ी के ऊपर,
उज्जैन, मध्य प्रदेश
यह स्थान 84 महादेव में से एक अत्यंत शक्तिशाली तीर्थस्थल है, जहाँ शिव का भैरव रूप साक्षात अनुभव किया जा सकता है।

84 महादेव : श्री डमरुकेश्वर महादेव (4)
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