स्थान: मोदी की गली, उज्जैन
स्वर्ग और अक्षय कीर्ति प्रदान करने वाला पुण्यलिंग

📜 श्लोक (स्कन्द पुराण – महाकाल संहिता):
“कलकलेश्वर देवस्य समीपे वामभागतः।
लिंगपापहरं तत्र समाराधय यत्नतः।।”

📖 श्लोक अर्थ:
हे पार्वती! कलकलेश्वर महादेव के समीप, उनके बाएं भाग में स्थित यह लिंग पाप नाश करने वाला है। जो श्रद्धा और प्रयासपूर्वक इसकी आराधना करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।


📚 पौराणिक कथा: पुण्य, कीर्ति और स्वर्ग की खोज में इन्द्रद्युम्न

प्राचीन समय में इन्द्रद्युम्न नामक एक राजा था जो:

  • निष्काम भाव से अनेक शुभ कर्म करता था
  • जनकल्याण में जीवन समर्पित कर दिया
  • इन कर्मों के फलस्वरूप उसे स्वर्ग प्राप्त हुआ

किन्तु कुछ समय पश्चात:

  • राजा के पुण्य समाप्त होने लगे
  • और वह स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर पुनः जन्म को प्राप्त हुआ
  • वह शोकसंतप्त हो गया और इस रहस्य को समझ गया कि – “पुण्य सीमित है, और जब तक पुण्य है, तब तक ही स्वर्ग।”

🔥 मार्कण्डेय ऋषि का मार्गदर्शन और शिवलिंग की पूजा

राजा ने हिमालय की यात्रा की और वहाँ महर्षि मार्कण्डेय से भेंट की। उसने पूछा:

“ऐसी कौन सी तपस्या या साधना है जिससे कीर्ति स्थिर और अक्षय हो जाए?”

तब ऋषि ने उत्तर दिया:

“राजन! महाकाल वन में जाओ,
वहाँ कलकलेश्वर महादेव के वाम भाग में एक दिव्य लिंग है,
उसका पूजन करने से अक्षय पुण्य व कीर्ति प्राप्त होती है।”

राजा इन्द्रद्युम्न महाकाल वन पहुँचा और श्रद्धा पूर्वक लिंग की पूजा की।


🌟 स्वर्गीय कीर्ति की प्राप्ति और नामकरण

पूजन के उपरांत:

  • देवता, गन्धर्व, यक्ष आदि राजा की प्रशंसा करने लगे
  • उन्होंने कहा: “हे राजन! अब तुम्हारी कीर्ति पवित्र और अक्षय हो चुकी है।
    यह लिंग अब से ‘इन्द्रद्युम्नेश्वर’ के नाम से जाना जाएगा।”

इस प्रकार राजा के कर्म, तप और श्रद्धा ने उन्हें नवजीवन, स्वर्ग, और अमर कीर्ति प्रदान की।


🙏 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)

  • स्वर्ग की प्राप्ति
  • पुण्य का संचय
  • यश, कीर्ति और सम्मान की प्राप्ति
  • निंदा और पाप से मुक्ति
  • विशेष तिथियाँ:
    • अमावस्या
    • श्रावण मास
    • सोमवार एवं गुरुवार

🛕 मंदिर की स्थिति (Location)

📍 श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर महादेव मंदिर
📍 मोदी की गली, उज्जैन, मध्य प्रदेश
(कलकलेश्वर महादेव के समीप वामभाग में स्थित)

84 महादेव : श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर महादेव(15) 
84 महादेव : श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर महादेव(15) 

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