स्थान: सिंहपुरी, उज्जैन
कुटुंब वृद्धि व रोग नाश का दिव्य शिवलिंग
📜 श्लोक (स्कन्द पुराण – महाकाल संहिता):
“कुटुम्बेश्वर संज्ञन्तु देवं विद्धि चतुर्दशम्।
यस्य दर्शन मात्रेण गौत्र विद्धिश्च जयते।।”
📖 श्लोक अर्थ:
हे देवी! जानो कि यह चतुर्दश (14वां) देव श्री कुटुम्बेश्वर हैं, जिनके दर्शन मात्र से गोत्र की वृद्धि और कुटुंब का कल्याण होता है।
📚 पौराणिक कथा: शिव की करुणा और क्षिप्रा की सेवा भावना
समुद्र मंथन के समय जब भीषण विष (हलाहल) निकला, तब:
- देव, असुर और यक्षगण भी भयभीत हो उठे
- सबने भगवान शिव से रक्षा की प्रार्थना की
- शिवजी ने मोर रूप धारण कर विष को स्वयं पी लिया
वह विष अत्यंत प्रचंड था, जिससे शिव भी व्यथित हो उठे। उन्होंने उस विष को:
- पहले गंगा, फिर यमुना, सरस्वती आदि नदियों से दूर ले जाने का अनुरोध किया
- परंतु सभी नदियों ने असमर्थता जताई
तब क्षिप्रा मैया ने महादेव की आज्ञा शिरोधार्य की। उन्होंने:
- विष को लेकर महाकाल वन गईं
- उसे कामेश्वर के सामने स्थित लिंग पर प्रवाहित कर दिया
🔥 विषलिंग की विपत्ति और ब्राह्मणों का पुनर्जीवन
विष के प्रभाव से:
- वह लिंग विषमयी हो गया
- जो भी उसका दर्शन करता, मृत्यु को प्राप्त होता
- एक बार कुछ ब्राह्मण तीर्थयात्री वहां पहुंचे और लिंग का दर्शन कर मृत्यु को प्राप्त हो गए
महादेव को जब यह ज्ञात हुआ:
- वे स्वयं वहाँ पहुंचे
- अपनी दिव्य दृष्टि से ब्राह्मणों को पुनर्जीवित किया
ब्राह्मणों ने शिवजी से प्रार्थना की कि इस लिंग को सुरक्षित व पूजनीय बनाया जाए।
🌿 लकुलीश वंश के पूजन से विषमुक्ति और कुटुंब वृद्धि का वरदान
महादेव ने कहा:
“जल्द ही लकुलीश वंश के ब्राह्मण यहां आएंगे, वे इस लिंग को स्पर्श व पूजन के योग्य बनाएंगे।
तब से यह लिंग ‘कुटुम्बेश्वर’ के नाम से प्रसिद्ध होगा।
इसके दर्शन मात्र से कुटुंब की वृद्धि होगी।”
लकुलीश वंश के आगमन और पूजा से यह लिंग विषमुक्त हुआ।
🙏 दर्शन लाभ (Benefits of Darshan)
- कुटुंब में वृद्धि और वंश विस्तार
- रोगों से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि
- राजसूय और वाजपेय यज्ञ जितना पुण्य लाभ
- विशेष तिथियाँ:
- रविवार और सोमवार
- अष्टमी व चतुर्दशी
- श्रावण मास में क्षिप्रा स्नान के साथ दर्शन विशेष फलदायक
🛕 मंदिर की स्थिति (Location)
📍 श्री कुटुम्बेश्वर महादेव मंदिर
📍 सिंहपुरी, उज्जैन, मध्य प्रदेश
(महाकाल वन क्षेत्र के एक प्रमुख पूजनीय स्थल)

84 महादेव : श्री कुटुम्बेश्वर महादेव (14)
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